Varamahalakshmi 2021: वरलक्ष्मी व्रत आज, प्रदोष और सर्वार्थसिद्धि योग में करें लक्ष्मी पूजा

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lekhaka-Gajendra sharma

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नई दिल्ली, 20 अगस्त। आज वरलक्ष्मी पूजा है।श्रावण माह की पूर्णिमा से ठीक पहले आने वाले शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए वरलक्ष्मी व्रत किया जाता है। वरलक्ष्मी व्रत मुख्यत: दक्षिण भारत में अधिक प्रचलित है, लेकिन इसके चमत्कारिक प्रभाव के कारण अब उत्तर भारत में भी कई राज्यों में यह व्रत किया जाने लगा है। विष्णु पुराण और नारद पुराण में इस व्रत के बारे में उल्लेख है किजो व्यक्ति वरलक्ष्मी व्रत करता है वह धन, वैभव, संपत्ति और उत्तम संतान से युक्त होता है। इस व्रत को करने से मां लक्ष्मी का पूर्ण वरदान प्राप्त होता है और व्यक्ति की अनेक पीढ़ियों से अभाव और गरीबी की छाया मिट जाती है। वर का अर्थ है वरदान और लक्ष्मी का अर्थ है धन-वैभव। वरलक्ष्मी व्रत करने वाले मनुष्य के परिवार को समस्त सुख और संपन्नता की प्राप्ति सहज ही हो जाती है।

कब आता है वरलक्ष्मी व्रत

वरलक्ष्मी व्रत श्रावण पूर्णिमा अर्थात् रक्षाबंधन से ठीक पहले आने वाले शुक्रवार को किया जाता है। इस साल श्रावण पूर्णिमा 22 अगस्त को आ र है, उससे पहले का शुक्रवार आज है इसलिए आज वरलक्ष्मी व्रत है। यह व्रत आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर किया जाता है। अब राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात जैसे राज्यों में भी किया जाने लगा है। इस बार वरलक्ष्मी व्रत के दिन प्रदोष, सर्वार्थसिद्धि योग और रवियोग का शुभ संयोग बन रहा है जो अधिक सिद्धिदायक होगा।

वरलक्ष्मी व्रत के लाभ

वरलक्ष्मी व्रत केवल विवाहित महिलाएं ही कर सकती हैं। कुंवारी कन्याओं के लिए यह व्रत करना वर्जित है। परिवार के सुख और संपन्नता के लिए विवाहित पुरुष भी यह व्रत कर सकते हैं। यदि पति-पत्नी दोनों साथ में यह व्रत रखें तो दुगुना फल प्राप्त होता है। व्रत के प्रभाव से जीवन के समस्त अभाव दूर हो जाते हैं। आर्थिक संकट दूर हो जाते हैं और व्रती के जीवन में धन का आगमन आसान हो जाता है। वरलक्ष्मी व्रत से आठ प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती हैं। ये हैं श्री, भू, सरस्वती, प्रीति, कीर्ति, शांति, संतुष्टि और पुष्टि। अर्थात वरलक्ष्मी व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में धन, संपत्ति, ज्ञान, प्रेम, प्रतिष्ठा, शांति, संपन्नता और आरोग्यता आती है। इसे करने से सौंदर्य में भी वृद्धि होती है।

पूजन सामग्री

मां लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र, पुष्प, पुष्प माला, कुमकुम, हल्दी, चंदन चूर्ण, अक्षत, विभूति, मौली, दर्पण, कंघा, आम के पत्ते, पान के पत्ते, पंचामृत, दही, केले, दूध, जल, धूप बत्ती, दीपक, कर्पूर, घंटी, प्रसाद, एक बड़ा कलश।

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पूजा विधि

वरलक्ष्मी की उत्पत्ति क्षीरसागर से मानी गई है। गौर वर्ण की यह देवी दुग्ध के समान धवल वस्त्र धारण किए रहती है। इस दिन महिलाएं और पुरुष व्रत रखें। लक्ष्मी की पूजा ठीक उसी प्रकार की जाती है जैसे दीपावली पर लक्ष्मी पूजा की जाती है। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर एक कलश सजाकर उस पर श्वेत रंग की रेशमी साड़ी सजाई की जाती है। वरलक्ष्मी को विभिन्न प्रकार के सुगंधित पुष्प, मिठाई अर्पित किए जाते हैं।

वरलक्ष्मी पूजन मुहूर्त 20 अगस्त 2021

  • सिंह लग्न पूजा- प्रात: 6.06 से प्रात: 7.58 बजे तक
  • वृश्चिक लग्न पूजा- दोपहर 12.31 से दोपहर 2.41 बजे तक
  • कुंभ लग्न पूजा- सायं 6.41 से रात्रि 8.11 बजे तक

नोट : ये मुहूर्त कालगणना के मानक स्थान उज्जैन के सूर्योदय के अनुसार है। स्थानीय सूर्योदय के अनुसार इन समयों में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।

English summary

Varamahalakshmi festival is the most auspicious festival celebrated by a married woman to commemorate Goddess Mahalakshmi. Here is Significance of Varalaxmi Vrat and fasting rituals.



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