Navagraha Shanti: नवग्रहों का आपके जीवन पर असर और इनके दुष्प्रभावों से बचने के उपाय

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जीवन मेें होने वाले समस्त बदलावों को ज्योतिष में ग्रहों की स्थिति के आधार पर आंका जाता है। ज्योतिष के जानकारों की मानें तो सभी नौ ज्योतिष ग्रह ही मुख्य रूप से हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं।

दरअसल जानकारों के अनुसार किसी जातक की कुंडली में विराजित ग्रह और उनकी चाल के कारण ही उसके जीवन में सफलता या कठिनाई का दौर आता है। वहीं उसकी प्रगति, मान, सम्मान, यश व अपमान के कारक भी यही ग्रह होते हैं। ऐसे में ग्रह के उचित अवस्था में होने पर ये जातक को शुभ रहते हैं, जबकि नीच होने या दुष्ट ग्रहों की दृष्टि होने पर जातक के लिए परेशानी खड़ी करते हैं।

ऐसे में इनका एकमात्र उपाय इन ग्रहों की शांति से जुड़ा हुआ है। इस संबंध में ज्योतिष के जानकार पंडित सुनील शर्मा का कहना है कि वे ग्रह जो जातक के लिए समस्या पैदा करते हैं। उन्हें उनके शांति मंत्र के माध्यम से शांत कर जीवन को ऊंचाई पर ले जाना आसान हो जाता है। सभी नौ ग्रहों की शांति के मंत्र इस प्रकार हैं।

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1- मंगल ग्रह
ज्योतिष में मंगल ग्रह को क्रूर माना गया है। यह जिस भी जातक की कुण्डली में नीच स्थिति या फिर गलत भाव में बैठ जाए, तो उसकी जिंदगी तबाह कर सकता है। ज्योतिष के जानकारों के अनुसार मंगल ग्रह के दर्शन-पूजन-दान व जाप से पराक्रम प्राप्त होता है एवं मांगलिक दोष शांत होता है।

मंगल शांति मंत्र
मंगल ग्रह की शांति के लिए मंत्र – ॐ हृं श्रीं भौमाय नमः। जप मंत्र – ॐ भौं भौमाय नमःबीज मंत्रॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नमःतांत्रिक मंत्रॐ अं अंङ्गारकाय नम:वैदिक मंत्रॐ अग्निमूर्धा दिव: ककुत्पति: पृथिव्या अयम्। अपां रेतां सि जिन्वति।। ध्यान मंत्ररक्तमाल्याम्बरधरं हेमरूपं चतुर्भुजम्। शक्तिशूलगदापन् धरन्तं स्वकारां बुजैः। मंगल गायत्री मंत्रॐ अंगारकाय विहे शक्तिहस्ताय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात्। इसकी जप संख्या 10000 है।

2- केतु ग्रह:
ज्योतिष में केतु एक क्रूर ग्रह है, परंतु यदि केतु कुंडली में मजबूत होता है तो जातकों को इसके अच्छे परिणाम मिलते हैं जबकि कमज़ोर होने पर यह अशुभ फल देता है। ज्योतिष में केतु को किसी भी राशि का स्वामित्व प्राप्त नहीं है। यह आध्यात्म, वैराग्य, मोक्ष, तांत्रिक आदि का कारक होता है। लेकिन यही ग्रह राहु के साथ मिलकर काल सर्प योग का निर्माण करता है, वहीं ये चंद्र का भी शत्रु कहलाता है।

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केतु शांति मंत्र:
केतु ग्रह की शांति के लिए मंत्र – ॐ हृीं केतवे नमः। बीज मंत्र – ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः। तांत्रिक मंत्र – ॐ कें केतवे नमः। वैदिक मंत्र – ॐ केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्या अपेशसे। सुमुषद्भिरजायथा:।। ध्यान मंत्र – धम्रवर्ण द्विबाहुं च केतुं च विक्रताननाः। गृध्रासनगतं नित्यं ध्यायेत् सर्व फलाप्तये। केतु गायत्री – ॐ पपुत्राय विहे धुम्रवर्णाय धीमहि तन्नो केतु प्रचोदयात्। जप संख्या 17000।

3- शनि ग्रह
शनि ग्रह एक ऐसा ग्रह है जिसकी क्रूर दृष्टि यदि किसी जातक पर हो, तो उसकी दुनिया तहस-नहस हो जाती है, यह न्याय का देवता भी कहलाता है। वहीं शनि चंद्र से मिलकर विषयोग का निर्माण करता है। जबकि कई देव ग्रहों से शत्रुता के बीच शनि दैत्य गुरु शुक्र से अच्छी मित्रता रखता है।

शनि शांति मंत्र
शनि की साढ़ेसाती एवं ढैय्या में लोग शनि ग्रह की शांति और पूजन का सहारा लेते हैं। ताकि इसका प्रभाव कम हो सके। जप मंत्र – ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः। बीज मंत्र – ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः। तांत्रिक मंत्र – ॐ शं शनैश्चराय नमः। ध्यान मंत्र – नीलांबरो नीलवपुः किरीटी गृध्रस्थितस्त्रास करो धनुष्मान्। चतुर्भुजस्सूर्यसुतः प्रशान्त सदाऽस्तु मह्यं वरदः प्रसन्नः। वैदिक मंत्र – ॐ शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये।शं योरभि स्त्रवन्तु न:।। शनि गायत्री – ॐ सूर्यपुत्राय विहे नीलांजनाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोदयात्। शनि गायत्री मंत्र की जप संख्या 23000 है।

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4- राहु ग्रह
राहु ग्रह ज्योतिष की दृष्टि से पापी ग्रह माना जाता है। यह शनि ग्रह से भी बुरा असर देता है, लेकिन जब यह शुभ प्रभाव देता है तो यह वह सब प्रदान करता है जो कोई दूसरा ग्रह नहीं दे सकता। यह सबसे पहले जातक की मानसिक हालत को खराब करता है। इसलिए यदि किसी जातक की कुण्डली में राहु की महादशा चल रही हो, तो उसे जल्द से जल्द राहु ग्रह की शांति के उपाय कर लेने चाहिए।

राहु शांति मंत्र
राहु ग्रह की शांति के लिए मंत्र इस प्रकार हैं। जप मंत्र – ॐ ऐं हृीं राहवे नमः। बीज मंत्र – ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः। तांत्रिक मंत्र – ॐ रां राहवे नमः। वैदिक मंत्र – ॐ कया नश्चित्र आ भुवदूती सदावृध: सखा। कया शचिष्ठया वृता।। ध्यान मंत्र – करालवदनं खड्गचर्म शूलवरान्वितम्। नीलसिंहासनस्थं च ध्यायेत राहुं प्रशान्तये। राहु गायत्री – ॐ शिरोरूपाय विहे अमृतेशाय धीमहि तन्नो राहु प्रचोदयात्। जप संख्या 18000

5- चंद्र ग्रह
किसी जातक की कुण्डली में कमजोर चंद्र ग्रह उसकी मानसिक स्थिति को खराब करता है। जातक की मानसिक हालत का सीधा संबंध चंद्र से होता है, जिसके बिगड़ने से वह अपना मानसिक आपा भी खो सकता है। यदि चंद्रमा सही स्थिति में हो तो जातक को यश की प्राप्ति होती है।

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चंद्र शांति मंत्र:
चंद्र ग्रह की शांति के लिए जप मंत्र – ऊॅं श्रीं कीं चं चन्द्राय नमः। बीज मंत्र – ऊॅं श्रां श्रीं श्रौं चन्द्रमसे नमः। तांत्रिक मंत्र – ऊॅं सों सोमाय नमः। ध्यान मंत्र – गदायुधधरं देवं श्वेतवर्ण निशाकरम्। ध्यायेत् अमृतसंभूतं सर्वकामफलप्रदम्। वैदिक मंत्र – ॐ इमं देवा असपत्नं सुवध्यं महते क्षत्राय महते ज्यैष्ठ्याय महते जानराज्यायेन्द्रस्येन्द्रियाय। इमममुष्य पुत्रममुष्यै पुत्रमस्यै विश एष वोऽमी राजा सोमोऽस्माकं ब्राह्मणानां राजा।। चन्द्र गायत्री – ॐ अमृताड्गांय विहे कलारूपाय धीमहि तन्नो सोमः प्रचोदयात्। चंद्र गायत्री मंत्र की जप संख्या 11000 है।

6- सूर्य ग्रह
सूर्य यदि कुण्डली में उचित स्थिति में बैठा हो, तो ऐसा जातक हमेशा रोगमुक्त रहने के साथ ही मान सम्मान पाता है। कभी कोई बड़ी बीमारी ऐसे जातक को छू भी नहीं सकती। लेकिन यदि किसी जातक की कुण्डली में सूर्य की स्थिति सही ना हो तो उसे जीवन में कई बार अपमान सहित कई अनापेक्षित स्थितियों का भी सामना करना पड़ता है।

सूर्य शांति मंत्र
सूर्य ग्रह की शांति के लिए जप मंत्र – ऊॅं सूं सूर्याय नमः। बीज मंत्र – ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः। तांत्रिक मंत्र – ऊॅं हृीं घृणिः सूर्याय नमः। ध्यान मंत्र – द्विभुजं पहस्तं च वरदं मुकुटान्वितम्। पीड़ाहरण मंत्र – ग्रहणामादिरा दित्यो लोकरक्षण कारकः। वैदिक मंत्र – ॐ आ कृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यं च। हिरण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन्।। सूर्य गायत्री – ॐ आदित्याय विद्महे भास्कराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्। सूर्य गायत्री मंत्र की जप संख्या 7000 होनी चाहिए।

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7- बुध ग्रह
बुध ग्रह मुख्य रूप से बुद्धि का प्रतिनिधित्व करता है। ज्योतिष अध्ययनों की मानें तो बुध ग्रह के दर्शन-पूजन-दान व जाप से व्यापार में वृद्धि होती है। वहीं यदि बुध ग्रह किसी क्रूर अथवा पापी ग्रहों से पीड़ित हो तो यह जातक के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से समस्या उत्पन्न है। इस स्थिति में जातक अपने विचारों को सही रूप में बोलकर पेश नहीं कर पाता है साथ ही वह गणित विषय में कमज़ोर होता है। साथ ही यह जीवन में दरिद्रता लाता है।

बुध शांति मंत्र
बुध ग्रह की शांति के लिए जप मंत्र – ॐ ऐं स्त्रीं श्रीं बुधाय नमः। बीज मंत्र – ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः। तांत्रिक मंत्र – ॐ बुं बुधाय नमः। ध्यान मंत्र – सिंहारूढं चतुबाहुं खड्गंचर्मगदाधरम्। सोमपुत्रं महासौम्यं ध्यायेत सर्वार्थासिद्धिम। वैदिक मंत्र – ॐ उद्बुध्यस्वाग्ने प्रति जागृहि त्वमिष्टापूर्ते सं सृजेथामयं च। अस्मिन्त्सधस्‍थे अध्‍युत्तरस्मिन् विश्वेदेवा यजमानश्च सीदत। बुध गायत्री – ॐ सौम्यरूपाय विहे वाणेशाय धीमहि तन्नो बुधः प्रचोदयात्। बुध गायत्री मंत्र की जप संख्या 4000 है।

8- गुरु ग्रह
गुरु ग्रह मनुष्य के ज्ञान को नियंत्रित करता है। जिसकी जन्म पत्रिका में गुरु की स्थिति अच्छी हो, वह जातक यकीनन बुद्धिमान एवं प्रतापी होगा। वहीं पीड़ित गुरु के कारण जातक को विभिन्न क्षेत्रों में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही व्यक्ति की वृद्धि थम जाती है और उसके मूल्यों का ह्रास होता है।

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गुरु शांति मंत्र
गुरु ग्रह की शांति के लिए जप मंत्र – ॐ हृीं क्लीं हृूं बृहस्पतये नमःबीज मंत्रॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरूवे नमःतांत्रिक मंत्रॐ बृं बृहस्पतये नमः ध्यान मंत्रदण्डाक्षमाला वरद कमण्डलुधरं विभूम्। पुष्परागांकितं पीतं वरदं भावयेद् गुरूम्वैदिक मंत्रॐ बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु।यद्दीदयच्छवस ऋतप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्।। गुरू गायत्रीॐ गुरूरूपाय विहे दिव्यदेहाय धीमहि तन्नो गुरू प्रचोदयात्। इसकी जप संख्या 19000 है।

9- शुक्र ग्रह
शुक्र ग्रह भाग्य का कारक होने के साथ ही सौंदर्य, रोमांस, प्रेम और अन्य स्वाभाविक तत्वों का प्रतिनिधित्व करता है। पीड़ित शुक्र के कारण व्यक्ति के वैवाहिक जीवन में मतभेद व अन्य परेशानियां आती हैं। साथ ही व्यक्ति भौतिक सुखों के अभाव में जीता है।

शुक्र शांति मंत्र
यदि किसी जातक की कुण्डली में शुक्र ग्रह बुरी दशा में हो, तो उसकी शांति के लिए उन मंत्रों का जप करें। जप मंत्र – ॐ हृीं श्रीं शुक्राये नमः। बीज मंत्रॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राये नमः। तांत्रिक मंत्रॐ शुं शुक्राये नमः। ध्यान मंत्रजटिल चाक्षसूत्रं च वरदण्डकमण्डलुम। श्वेतवस्त्रावृतं शुक्रं ध्यायेत् दानवपूजितम्। वैदिक मंत्र – ॐ अन्नात्परिस्त्रुतो रसं ब्रह्मणा व्यपिबत् क्षत्रं पय: सोमं प्रजापति:। ऋतेन सत्यमिन्द्रियं विपानं शुक्रमन्धस इन्द्रस्येन्द्रियमिदं पयोऽमृतं मधु।। शुक्र गायत्री – ॐ भार्गवाय विहे शुक्लांबराय धीमहि तन्नो शुक्रः प्रचोदयात्। इस मंत्र की जप संख्या 10000 है।





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