Kanya Sankranti 2021: कन्या संक्राति पर करें विश्वकर्मा जी का पूजन साथ ही जानें इस बार क्या है खास

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कन्या संक्रांति के दौरान विश्वकर्मा भगवान की पूजा

हिंदू पंचांग के अनुसार साल के 12 माह में सूर्य हर माह एक राशि में विचरण करता है। ऐसे में हर माह सूर्य का परिवर्तन संक्रांति कहलाता है। जो राशि के नाम के अनुसार होता है। ऐसे में सितंबर 2021 में यानि हिंदू कैलेंडर के अनुसार इस भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानि 17 सितंबर शुक्रवार को सूर्य कन्या राशि में गोचर करेंगे। जिसे कन्या संक्राति के नाम से जाना जाएगा।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार सूर्य के द्वारा इस तरह से राशि बदलने का प्रभाव सभी राशियों की कुंडलियों पर पड़ता हैं। ऐसे में हर संक्रांति का अलग महत्व माना गया है। वहीं कन्या संक्रांति के दौरान विश्वकर्मा भगवान की पूजा की जाती है। कन्या संक्रांति वैसे तो पूरे देश में ही मनाई जाती है, लेकिन यह पश्चिम बंगाल और ओडिशा में खासतौर से मनाई जाती है।

कन्या संक्रांति 2021 के शुभ मुहूर्त :
– पुण्य काल मुहूर्त: सितंबर 17,2021 06:17 AM से 12:15 PM तक
– महापुण्य काल मुहूर्त: सितंबर 17,2021 06:17 AM से 08:10 AM तक
– कन्या संक्रांति पर सूर्योदय: सितंबर 17,2021 06:17 AM तक
– कन्या सक्रांति पर सूर्यास्त: सितंबर 17,2021 06:24 PM तक

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कन्या संक्रांति 2021 से जुड़ी खास बातें-

1. अपनी राशि कन्या में पहले से मौजूद बुध ग्रह के बाद अब 17 सितंबर को इसी राशि में सूर्य प्रवेश कर जाएगे, जिसके चलते यहां सूर्य और बुध मिलकर इस जगह बुधादित्य योग बनाएंगे।

2. कन्या संक्रांति 2021 की एक खास बात ये भी है कि इस बार सूर्य का कन्या राशि में गोचर बुधवार से शुरु हो रहा है। ऐसे में जहां बुध ही कन्या राशि के स्वामी हैं, वहीं इस दौरान गणेश उत्सव भी जारी है और श्री गणेशजी ही बुध के कारक देव भी हैं।

3. इस परिवर्तन के चलते कन्या राशि के जातकों का समाज में मान-सम्मान बढ़ने के साथ ही नौकरी और व्यापार में उन्नति के योग भी बनेंगे।

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4. वहीं इस दिन पितरों की शांति के लिए पूजा-अर्चना भी की जाती है। साथ ही इस दिन गरीबों को दान देना शुभ माना जाता है।

5. कन्या संक्रांति पर नदी में स्नान करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन स्नान के पश्चात भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य देते हुए उनकी पूजा करनी चाहिए।

6. इसके साथ ही कन्या संक्रांति पर विश्वकर्मा जी का पूजन भी किया जाता है, ऐसे में इस तिथि का महत्व और अत्यधिक बढ़ जाता है। उड़ीसा और बंगाल में इस दिन नियम के अनुसार पूजा-अर्चना की जाती है।





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