CHATURDASHI SHRADH-चतुर्दशी श्राद्ध: पितृ पक्ष में चतुर्दशी तिथि है अति​ विशेष, जानें इस दिन कैसे और किनका करें श्राद्ध?

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Chaturdashi Shradh- चतुर्दशी श्राद्ध: इस दिन भूलकर भी न करें इनका लोगों का श्राद्ध

पितृ पक्ष 2021 के समापन के दिन करीब आ चुके हैं। ऐसे में मंगलवार, 05 अक्टूबर को चतुर्दशी श्राद्ध पड़ रहा है। श्राद्ध के लिए चतुर्दशी तिथि अति विशेष मानी गई है और इस दिन केवल उन्हीं लोगों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु अकाल (अचानक से या फिर किसी दुर्घटना में) हुई हो।

पंडित एके शर्मा के अनुसार चतुर्दशी का श्राद्ध अकाल मृत्यु से जुड़ा है, ऐसे में कोरोना संक्रमण के चलते मौत (असामान्य मृत्यु) का ग्रास बनने वालों का श्राद्ध भी इस दिन किया जा सकता है। पंडित शर्मा के अनुसार दरअसल इस दिन आत्‍महत्‍या, भय या फिर अन्‍य किसी वजह से मरने वाले लोगों का श्राद्ध भी किया जाता है। कुल मिलाकर असामान्य परिस्थितियों में हुई मृत्यु वाले व्यक्ति का श्राद्ध इस दिन करने का विधान है।

पंडित शर्मा के मुताबिक जिस किसी की सामान्य और स्वाभाविक मृत्यु चतुर्दशी को हुई हो, उनका भी श्राद्ध चतुर्दशी तिथि को नहीं करना चाहिए। ऐसे में ऐसे लोगों का श्राद्ध श्राद्ध पक्ष की त्रयोदशी या अमावस्या को करना चाहिए।

वहीं जिनकी अपमृत्यु हुई हो, यानि जिनकी मौत किसी दुर्घटना,हत्या, शस्‍त्रप्रहार, सर्पदंश, विष, आत्महत्या या किसी भी प्रकार से अस्वा‍भाविक मृत्यु हुई हो, ऐसे लोगों का श्राद्ध मृत्यु तिथि की बजाय केवल चतुर्दशी तिथि को ही करना चाहिए, चाहे उनकी मृत्यु किसी भी ति‍थि को हुई हो। वहीं महाभारत के एक पर्व में भी इस चतुर्दशी तिथि के श्राद्ध का जिक्र है। जिसमें भीष्‍म पितामह ने युधिष्ठिर को चतुर्दशी श्राद्ध से जुड़ी कुछ बातों के बारे में बताया था।

पं. शर्मा के अनुसार महाभारत के इस पर्व में युधिष्ठिर से भीष्‍म पितामह ने कहा था कि जिन लोगों की स्‍वाभाविक मृत्‍यु न हुई हो, उनका श्राद्ध पितृ पक्ष की चतुर्दशी पर ही करना चाहिए।

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माना जाता है कि इस तिथि पर स्‍वाभाविक यानि सामान्य मृत्‍यु को प्राप्‍त होने वाले लोगों का श्राद्ध नहीं किया जाता है। महाभारत में इस तिथि से संबंधित जो जानकारी है उसके अनुसार जिनकी मौत सामान्य परिस्थिति में हुई है, चाहे इसी तिथि को क्यों न हुई हो। उन लोगों का श्राद्ध चतुर्दशी तिथि को करने से श्राद्धकर्ता को काफी दिक्कतों व आर्थिक तंगी से दो चार होना पड़ सकता है।

वहीं कूर्मपुराण के अनुसार भी स्‍वाभाविक रूप से मरने वाले लोगों का श्राद्ध चतुर्दशी तिथि को करने से संतान को कष्‍ट भोगने पड़ते हैं।

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इसके अतिरिक्त शास्‍त्रों में भी कहा गया है कि जिन लोगों की मृत्‍यु शस्‍त्रों, किसी जहरीले सांप के काटने से, युद्ध में या फिर आत्‍महत्‍या करने से हुई हो उनका श्राद्ध चतुर्दशी के दिन किया जाता है। वहीं इसके अलावा जिनकी हत्या की गई हों उनका श्राद्ध भी इसी दिन किया जाना चाहिए।

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ये है चतुर्दशी की श्राद्ध विधि
पितृ यानि श्राद्ध पक्ष के दौरान तर्पण और श्राद्ध की विशेष विधि के अनुसार श्राद्धकर्ता को सबसे पहले (जौ,काला तिल, कुशा और अक्षत व जल को हाथ में लेकर) संकल्‍प करना चाहिए। संकल्प लेने के बाद “ऊं अद्य श्रुतिस्मृतिपुराणोक्त सर्व सांसारिक सुख-समृद्धि प्राप्ति च वंश-वृद्धि हेतव देवऋषिमनुष्यपितृतर्पणम च अहं करिष्ये” मंत्र का उच्चारण करें।

इसके बाद पूजा करें और फिर पितरों के निमित्‍त ब्राह्मणों को भोजन करवाएं और गाय, कुत्‍ते और कौए का भोजन निकालें। माना जाता है कि पितृ यानि श्राद्ध पक्ष में हमारे पितर ही पशु पक्षियों के रूप में परिवार से मिलने आते हैं।





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