नवरात्रि 2021: देवी मां के राशि के अनुसार मंत्रों के साथ ही जानें अष्टमी व नवमी के विशेष मंत्र

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9 मंत्र देवी के प्रत्येक अवतार के लिए महत्वपूर्ण

शारदीय नवरात्रि 2021 के साथ अब दुर्गा पूजा उत्सव भी शुरु हो चुका है। इस पर्व में भक्त देवी दुर्गा के 9 अवतारों से आशीर्वाद के लिए प्रार्थना करते हैं। पूजा के सभी नौ दिनों का अपना-अपना अर्थ और महत्व है।

वहीं पंडित एके शुक्ला के अनुसार कि नवरात्रि में राशि के अनुसार मंत्र जाप करने से मां शारदा सुख,यश, कीर्ति, संपत्ति, विद्या, बुद्धि, पराक्रम, प्रतिभा और विलक्षण वाणी का आशीष देती है।

इन सबकी प्राप्ति के लिए राशि अनुसार मंत्र का जाप करना विशेष माना जाता है, तो आइए जानते हैं राशि के अनुसार सरस्वती मंत्र:

मेष- ॐ वाग्देवी वागीश्वरी नम:।।
वृषभ- ॐ कौमुदी ज्ञानदायनी नम:।।
मिथुन- ॐ मां भुवनेश्वरी सरस्वत्यै नम:।।
कर्क- ॐ मां चन्द्रिका दैव्यै नम:।।
सिंह- ॐ मां कमलहास विकासिनि नम:।।
कन्या- ॐ मां प्रणवनाद विकासिनि नम:।।
तुला- ॐ मां हंससुवाहिनी नम:।।
वृश्चिक– ॐ शारदै दैव्यै चंद्रकांति नम:।।
धनु- ॐ जगती वीणावादिनी नम:।।
मकर– ॐ बुद्धिदात्री सुधामूर्ति नम:।।
कुंभ- ॐ ज्ञानप्रकाशिनि ब्रह्मचारिणी नम:।।
मीन- ॐ वरदायिनी मां भारती नम:।।

वहीं ज्योतिष के जानकारों के अनुसार इन नौ दिनों के 9 मंत्र देवी के प्रत्येक अवतार के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन अवतारों के मान्यता है कि वे कंपन पैदा करने के साथ ही ब्रह्मांड में भी गूंजते हैं और पूरी भक्ति के साथ जाप करने पर यह जीवन में शांति और खुशी लाते हैं।

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देवी सिद्धिदात्री (देवी मां दुर्गा का नवां स्वरूप)
हिंदू मान्यताओं के अनुसार शक्ति की देवी, आदि-पराशक्ति, भगवान शिव के बाएं आधे हिस्से से सिद्धिदात्री के रूप में प्रकट हुईं। यह अपने भक्तों को सभी प्रकार की सिद्धियां प्रदान करती हैं। यहां तक माना जाता है कि भगवान शिव को भी देवी सिद्धिदात्री से ही सभी सिद्धियां प्राप्त हुईं।
मंत्र: ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु मां सिद्धिदात्री रूपेण थिथिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

देवी महागौरी (देवी मां दुर्गा का आंठवां स्वरूप)
देवी शैलपुत्री के युवा और सुंदर रूप को ही महागौरी के नाम से जाना जाता है। इन्हें केवल सफेद कपड़ों में ही चित्रित किया गया है और इस प्रकार श्वेतांबरधारा शब्द आता है।
मंत्र: ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु मां महागौरी रूपेणेंथिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

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देवी कालरात्रि (देवी मां दुर्गा का सांतवां स्वरूप)
शुंभ और निशुंभ, राक्षसों को मारने के लिए जब देवी पार्वती ने बाहरी सुनहरी त्वचा को हटा दिया, तब उनका वह अवतार देवी कालरात्रि कहलाया। माना जाता है कि वह भक्तों को अभय और वरद मुद्राएं प्रदान करती हैं।
मंत्र : ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु मां कालरात्रि रूपेण थिथिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

देवी कात्यायनी (देवी मां दुर्गा का छठा स्वरूप)
देवी कात्यायनी को माता पार्वती का ही रूप माना गया है, और उनहोंने ही महिषासुर का नाश किया था। यह देवी पार्वती का सबसे हिंसक रूप था।
मंत्र: देवी कात्यायन्यै नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेणेंथिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

देवी स्कंदमाता (देवी मां दुर्गा का पांचवां स्वरूप)
चार भुजाओं के साथ देवी मां स्कंदमाता को चित्रित किया गया है और इनका वाहन एक शेर है, वहीं उनके दो हाथों में कमल है, उनके तीसरे हाथ में भगवान कार्तिकेय हैं, जबकि उन्हें चौथे हाथ से एक घंटी के साथ अपने सभी भक्तों को आशीर्वाद देते दिखती हैं। इन्हें शक्ति, मोक्ष, समृद्धि और खजाने का लाने वाला माना जाता है।
मंत्र: देवी स्कंदमातायै नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण स्थिरता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

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देवी कुष्मांडा (देवी मां दुर्गा का चौथा स्वरूप)
देवी मां इस रूप में अपनी दिव्य मुस्कान के साथ, दुनिया के निर्माता के रूप में मानी जाती हैं, जिन्हें देवी कुष्मांडा के नाम से जाना जाता है। इसमें कू का अर्थ है “थोड़ा”, उष्मा का अर्थ है “गर्मी” या “ऊर्जा” और अंडा का अर्थ है “ब्रह्मांडीय अंडा”।
मंत्र: देवी कूष्मांडायै नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण प्रतिष्ठितता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

देवी मां चंद्रघंटा (देवी मां दुर्गा का तीसरा स्वरूप)
माता पार्वती का विवाहित अवतार देवी चंद्रघंटा हैं, जो एक बाघिन की पीठ पर यात्रा करती हैं और इनके 10 हाथ दर्शाए गए हैं। अपने सभी हथियारों के साथ देवी चंद्रघंटा हमेशा युद्ध के लिए तैयार हैं। मान्यता के अनुसार उनके माथे पर चंद्र-घंटी की आवाज उनके सच्चे भक्तों से सभी प्रकार की बुरी आत्माओं को दूर कर देती है।
मंत्र : ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघण्टा रूपेणथिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

देवी ब्रह्मचारिणी (देवी मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप)
देवी ब्रह्मचारिणी को अपने गुरु के साथ एक आश्रम में रहने वाली एक समर्पित महिला छात्र माना जाता है। इस रूप में देवी मां श्वेत वस्त्र धारण किए हुए हैं, वहीं उनके दाहिने हाथ में माला और बायें हाथ में कमंडल है। इनकी पूजा सफलता, ज्ञान और ज्ञान के आशीर्वाद के लिए की जाती है। यह देवी पार्वती का अविवाहित रूप हैं।
मंत्र: देवी ब्रह्मचारिणी नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपे स्थिरता।
नमस्तस्यै नमस्त्स्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

देवी मां शैलपुत्री (देवी मां दुर्गा का पहला स्वरूप)
पहाड़ों की पुत्री देवी शैलपुत्री प्रकृति मां का रूप हैं। इन्हें देवी पार्वती, सती और हेमवती के रूप में भी जाना जाता है।
मंत्र: ऊँ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेणथिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥





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