गुरु अर्जुन देव शहादत दिवस 2021: जानिए इसके महत्व और इतिहास के बारे में

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गुरु अर्जुन देव के शांत स्वभाव और कुशाग्र बुद्धि के श्रेष्ठ गुणों को देख पिता रामदास ने मात्र 18 साल की उम्र में ही उन्हें गुरुगद्दी सौंप दी थी। गुरु अर्जुन देव ने सिखों को अपनी कमाई का दसवां हिस्सा धार्मिक और सामाजिक कार्यों में लगाने के लिए प्रेरित किया।

नई दिल्ली। गुरु अर्जुन देव सिखों के पांचवें गुरु थे। गुरु अर्जुन देव 16 जून, 1606 को शहीद हुए थे। साल 2021 में गुरु अर्जुन देव का शहीद दिवस 14 जून को है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, शहीद दिवस या गुरु अर्जुन देव का शहादत दिवस है जेठ सुदी 4 को मनाया गया, जो इस साल 14 जून को पड़ता है। गुरु अर्जुन देव जी का जन्म तरनतारन जिले के गोइंदवाल में 15 अप्रैल, साल 1563 में हुआ था। उनके पिता गुरु रामदास सिखों के चौथे गुरू थे और उनकी माता का नाम बीबी भानी था। गुरु अर्जुन देव जी शांत स्वभाव और कुशाग्र बुद्धि वाले थे।

मात्र 18 साल उम्र में संभाली गुरुगद्दी
गुरु अर्जुन देव के शांत स्वभाव और कुशाग्र बुद्धि के श्रेष्ठ गुणों को देख पिता रामदास ने मात्र 18 साल की उम्र में ही उन्हें गुरुगद्दी सौंप दी थी। गुरुगद्दी पर बैठते ही उन्होंने अपने पिता के आरंभ किए हुए सभी काम करना शुरू कर दिए। गुरु अर्जुन देव ने सिखों को अपनी कमाई का दसवां हिस्सा धार्मिक और सामाजिक कार्यों में लगाने के लिए प्रेरित किया। बाद में इसे धर्म का अंग बना दिया गया। ऐसे मानवीय कार्य में सभी लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा भी लेने लगे थे। गुरु अर्जुन देव जी का विवाह साल 1579 में माता गंगा के साथ हुआ था। दोनों के पुत्र का नाम हरगोविंद सिंह था, जो बाद में सिखों के छठे गुरु बने।

 

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सिख धर्म के पहले शहिद गुरु
गुरु अर्जुन देव सिख धर्म के पहले शहीद थे और मुगल सम्राट जहांगीर के आदेश पर उन्हें फांसी दी गई थी। मुगल उत्तर भारत में उसके बढ़ते प्रभाव और सिख धर्म के प्रसार से डरते थे। उन्होंने सिख ग्रंथ आदि ग्रंथ का पहला संस्करण संकलित किया था। जिसे अब गुरु ग्रंथ साहिब के नाम से जाना जाता है।

 

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क्यों शहीद हुए थे अर्जुन देव जी
अकबर की मौत के बाद उसका पुत्र जहांगीर बादशाह बना। जहांगीर को गुरु जी की बढ़ती लोकप्रियता को पसंद नहीं करता था। जहांगीर ने लाहौर जो की अब पाकिस्तान में है, अत्यंत यातना देकर उनकी हत्या करवा दी। अनेक कष्ट झेलते हुए गुरु जी शांत रहे, उनका मन एक बार भी कष्टों से नहीं घबराया। उन्हें शहीद करने का डर दिखाकर अपनी मर्जी के कार्य करवाने की कोशिश की लेकिन गुरु जी ने झूठ का साथ देने से साफ इनकार कर दिया और शहादत को चुना। गुरु अर्जुन देव जी ने धर्म के लिए अपने प्राणों तक की आहुति दे दी।

हर साल पाकिस्तान जाता है सिख तीर्थयात्रियों का जत्था
गुरु अर्जुन देव की शहादत दिवस पर लोग अक्सर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं। जहाँ वे श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ करते हैं। गुरुद्वारे में लंगर भी बांटे जाते हैं। इस साल कोविड-19 की दूसरी लहर के चलते कोई बड़ा आयोजन नहीं किया जाएगा। हर साल, सिख तीर्थयात्रियों का एक जत्था लाहौर में गुरुद्वारा देहरा साहिब में गुरु अर्जुन देव के शहादत दिवस को चिह्नित करने के लिए पाकिस्तान जाता है। इस साल, जत्था 6 जून को पाकिस्तान के लिए रवाना होने वाला था। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने शुक्रवार को कहा कि जत्था इस साल गुरु अर्जुन देव के शहादत दिवस को मनाने के लिए पाकिस्तान की यात्रा नहीं कर पाएगा क्योंकि पाकिस्तान ने कोरोमावायरस महामारी के कारण इसे अनुमति नहीं दी है।







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